Apj Abdul Kalam Biography In Hindi Wiki, Education, Life journey, Career,Awards

10 साल की उम्र में अखबार बेचने वाला एक बच्चा आगे चलकर सबसे पहला बैचलर प्रेसिडेंट (Bachelor President) बनता है| जी हां हम बात कर रहे हैं Apj Abdul Kalam जी की Biography के बारें मैं हिंदी में जानेंगे अंत तक जरूर बने रहे| हम सभी जानते हैं दुनिया के सबसे महानसाइंटिस्ट जिनकी बोली हुई हर एक बात दुनिया के लिए बहुत बड़ी चीज है| प्रेसिडेंट बनने का रास्ता उनके लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था अखबार बेचने से लेकर प्रेसिडेंट तक का सफर Apj Abdul Kalam जी बहुत ही कठिन था| तो इस लेख में हम Apj Abdul Kalam Biography In Hindi, wiki,Education,Career,Awards,Net Worth,Books और उनके निजी जीवन के बारे में बहुत ही विस्तार से लिखा है|

Apj Abdul Kalam Biography In Hindi

Apj Abdul Kalam जी एक मुस्लिम फैमिली से बिलॉन्ग करते थे इसकी वजह से उन्हें बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा पर इतनी सारी मुश्किलों में भी उन्होंने अपने पंख पहला के सारी दुनिया को दिखाया| Apj Abdul Kalam जी इंडिया के कई मिसाइल्स प्रोजेक्ट के उड़ान का भीवह कारण बन सके सारी मुसीबतों का उन्होंने डट के सामना किया और कैसे लोग उन्हें इंडिया का मिसाइल मैन कहने लगे कहीं सारे प्रश्नों के सवाल और Apj Abdul Kalam Biography In Hindi मै विस्तार से जानेंगे तो इस लेख को पूरा पढ़े और अपनी नॉलेज को और भी ज्यादा बढ़ाएं|

एपीजे अब्दुल कलाम की पूरी कहानी क्या है?

If you want to Shine like sun first burn like sun दुनिया को यह सिखाने वाले Dr Apj Abdul Kalam जी का जन्म 15 अक्टूबर 1931 में रामेश्वरम के तमिल मुस्लिम फैमिली में जन्म हुआ था| पेशे से उनके पिताजी जिनका नाम है Jainulabdeen वो एक नाव चलाने वाले थे| जो हिंदू तीर्थ यात्रियों को रामेश्वरम की नाव से सेर कराते थे और Apj Abdul Kalam जी की माँ Ashiamma Jainulabiddin एक हाउसवाइफ थी| Dr Apj Abdul Kalam जी का घर छोटा था पर उनका परिवार बहुत बड़ा था घर में चार भाई और एक बहन थी जिनमें अब्दुल कलाम जी सबसे छोटे थे|

परिवार बड़ा था तो घर में पैसों की समस्या हुआ करती थी इसीलिए घर की समस्याओं को थोड़ा कम करने के लिए Dr Apj Abdul Kalam जी 10 साल की उम्र में अखबार बेचने लगे थे| उन्होंने अखबार बेचने का काम भी सोच सोच समझ कर चुना था बचपन से ही अब्दुल कलाम जी को नॉलेज गेन करने की छह थी और इसी वजह से वह जब भी अखबार बेचते थे उस अखबार को अब्दुल कलाम जी एक बार जरूर पढ़ लेते थे पर नॉलेज गेन करने का रास्ता बिल्कुल भी आसान नहीं था| एक मुस्लिम और गरीब होने की वजह सेउन्हें हमेशा से ही तकलीफों का सामना करना पड़ता था|

एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन परिचय

मुस्लिम होने के वजह से डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा| उनमें से एक डिफिकल्टी उनके बचपन की ही है जब वो पांचवी कक्षा में थे तब उनका एक ब्राह्मण दोस्त था जिसके साथ वो पहले बेंच पर बैठते थे जिसका नाम RAMANADHA SASTRY था| रुरवाड़ी हिंदू ब्राह्मण परिवार से था और एक दिन उनके स्कूल में एक नए टीचर आए और एक मुस्लिम को ब्राह्मण के साथ देखकर वह चकराए उन्हें दोनों का एक साथ बैठना पसंद नहीं आया और उन्होंने डॉ अब्दुल कलाम जी को लास्ट बेंच में बैठाया ठान ली की लास्ट बेंच पर बैठ के दुनिया को बदल कर दिखाएंगे | और शायद इसलिए वह हमेशा कहते थे The best brain of the nation maybe found on the last benches of the classroom

कलाम का बचपन किस तरह का था?

क्लास के लास्ट बेंच पर बैठकर Dr Apj Abdul Kalam जी ने अपना फाइटर पायलट बनाने का एक गोल बनाया था और यह गोल उनके गुरु की वजह से बना था| एक दिन Dr Apj Abdul Kalam जी के गुरु शिवा सुब्रमण्यम अय्यर (Shiva Subramaniam Iyer) क्लास मै चिड़िया केसे उड़ती है पढ़ा रहे थे और बहुत देर समझाने के बाद भी बच्चों को समझ नहीं आ रहा था और इस वजह से अय्यर जी ने सिंपल सा सलूशन निकाला Theoretically किसिको ना समजे तो उसे प्रैक्टिकली करना चाहिए स्कूल खत्म होने के बाद शिवा सुब्रमण्यम अय्यर (Shiva Subramaniam Iyer) पास ही के समंदर किनारे बच्चों को ले गए और वहां पर उड़ते हुए पंछियों के लाइव डेमो दिखाकर बच्चों को अच्छी तरह से समझाया|

अब्दुल कलाम पढ़ाई कैसे करते थे?

जब शिवा सुब्रमण्यम अय्यर (Shiva Subramaniam Iyer) बच्चों को चिड़िया कैसे उड़ती है सिखा रहे थे चिड़ियों की वह उड़ान Dr Apj Abdul Kalam जी के दिमाग में बैठ गई और बड़े होकर फाइटर पायलट बनने जैसा बड़ा गोल हासिल करेंगे पर पर अपना सपना पूरा करने की रेस में वह हर गए| अपने सपने को पूरा करने के लिए 1955 मैं उन्होंने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Madras Institute of Technology) मैं Aerospace engineering इस फील्ड में एडमिशन ली, कॉलेज में Dr Apj Abdul Kalam जी को लो लेवल अटैक एयरक्राफ्ट (LOW LEVEL ATTACK AIRCRAFT) का प्रोजेक्ट मिला लेकिन सबमिशन के दिन उन्होंने अपना प्रोजेक्ट सबमिट किया तो प्रोफेसर को ये मॉडल पसंद नहीं आया उन्होंने Dr Apj Abdul Kalam जी को दूसरा मॉडल बनाने के लिए कहा|

जब प्रोफेसर ने नया मॉडल बनाने को कहा तब कलम जी ने कहा कि मुझे 1 महीने का टाइम दीजिए लेकिन उनके प्रोफेसर ने उनको सिर्फ 3 दिन का समय दिया और अगर उन्होंने समय में मॉडल नहीं बनाया तो उनको स्कॉलरशिप नहीं मिलेगी ऐसा उन्होंने कहा स्कॉलरशिप छिन जाने के डर से कलाम जी ने 3 दिन बिना सोये रात दिन काम किया और प्रोजेक्ट पूरा करके मोडेल प्रोफेसर के सामने पेश किया तो उनके प्रोफेसर चकित रह गए उनको पता था कि 3 दिन में मॉडल तैयार नहीं हो सकता लेकिन स्कॉलरशिप्स छिन जाने के डर से तुमने इसे पोसीबल किया|

अब्दुल कलाम द्वारा लिखित पुस्तक का नाम क्या है?

उनकी इंजीनियरिंग खत्म होने के बाद उनको अपना सपना पूरा करने के लिए एक अवसर मिला उनको Indian Air Force of Dehradun से इंटरव्यू के लिए बुलाया गया लेकिन उनका यह सपना अधूरा रहा क्योंकि इंटरव्यू में सिर्फ 25 लोगों मेसे सिर्फ 8 लोगों को चुना गया और कलम जी 9th पोजीशन मैन थे| सिर्फ एक पोजीशन के वजह से उनका सपना सपना ही रह गया था यह इंसिडेंट उनके लिए बहुत बड़ी सीख थी इसीलिए Dr Apj Abdul Kalam जी ने इस सिख को My Journey Transforming Dreams into Action इस ऑटो बायोग्राफी में लिखा है|

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जब उनका सिलेक्शन इंडियन एयरफोर्स में नहीं हो पाया तब उन्होंने 1958 में Defense Research and Development Organization को जॉइन कर लिया DRDO जॉइन करने के कुछ साल बाद ही उन्हे Vikram Sarabhai जी के इंडियन नेशनल कमिटी फॉर स्पेस रिसर्च (Indian National Committee for Space Research) INCOSPAR मैं प्रमोट कर दिया गया जहां पर उनका पहला मिशन था जहां पर इनका पहला मिशन था इंडिया के पहले रॉकेट की उड़ान भरना यह रॉकेट केरला के Thumba गाँव से लॉन्च होने वाला था, शुरुआती स्टेज में INCOSPAR इनके पास वर्कशॉप और रिसर्च फैसिलिटी नहीं थी|

तुंबा गांव के पुराने चर्च में वर्कशॉप बना लिया और आखिर में जैसे तैसे करके उन्होंने रॉकेट को पूरा बना लिया लेकिन यहां पर उनकी मुश्किलें खत्म नहीं हुई थी रॉकेट के पार्ट्स को लॉन्च पैड तक लेकर जाने के लिए उनके पास कोई साधन नहीं था उन्होंने सारे पार्ट्स बैलगाड़ी और साइकिल की मदत से लॉन्च पैड तक पहुंचाया इतनी मुश्किलों के बाद 21 नवंबर 1963 में रॉकेट को लॉन्च करके इंडिया ने इंडिया ने स्पेस की तरफ अपना पहला कदम रखा था| लेकिन जिस इंसीडेंट से Dr Apj Abdul Kalam जी नाम missile man पड़ा वह एक सक्सेस नहीं बल्कि एक फैलियर था साल 1969 में कलाम जी इसरो में इंडिया के सेटेलाइट प्रोजेक्ट सैटलाइट लॉन्च व्हीकल (SALV) प्रोजेक्ट डायरेक्टर थे|

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10 साल के खून पसीने की मेहनत के साथ उन्होंने इस रॉकेट को खड़ा किया प्रोजेक्ट के समय 1976 में कलाम जी के पिताजी की मौत हो गई और फिर भी कलाम जी अपने लक्ष्य से भटके नहीं उन्होंने इस प्रोजेक्ट को अपनी निजी जिंदगी से ऊपर रखकर काम किया लेकिन जब अगस्त 1979 को इसे लांच किया गया सेकंड स्टेज में कुछ टेक्निकल उसके वजह से रॉकेट बंगाल की खाड़ी में गिर गया अब जब प्रोजेक्ट फेल हो चुका था तो बहुत सारे लोग कलाम जी पर सवाल उठाने लगे थे तब प्रोफेसर सतीश धवन जो इसरो के चेयरमैन थे उन्होंने इस फैलियर का श्रेय खुद पर लिया उनके इस लीडरशिप की तारीफ करते थे

और फेलियर के एक साल बाद ही उन्होंने नए सेटेलाइट लॉन्चिंग व्हीकल एसएलवी 3 का निर्माण किया 18 जुलाई 1980 में उन्होंने SLV 3 Rohini 1 satellite लॉन्च किया जिससे इंडिया Super Exclusive क्लब ऑफ स्पेस फेरिंग नेशंस का सिक्स्थ मेंबर बन गया इस प्रोजेक्ट के बाद उन्होंने इंडिया में पहले Intermediate Range Ballistic Missile अग्नि और पृथ्वी जैसेकहीं प्रोजेक्ट में सक्सेस हासिल की जिनकी वजह से 1981 में पद्मभूषण 1990 में पद्मा विभूषण पुरस्कारों से नवाजा गया लेकिन जिस काम के लिए उनको 1997 में भारत रत्न से नवाजा गया था वो था पोखरण 2, पोकरण टू एक एसा बॉम्ब टेस्टिंग प्रोग्राम था जिसमें इंडिया ने cia के सेटेलाइट्स को चकमा देकर हमारे न्यूक्लियर बॉम्ब को टेस्ट किया था इस प्रोग्राम के चीफ कोऑर्डिनेटर थे डॉ एपीजे अब्दुल कलाम इन्होंने जापान और यूएसए की वार्निंग के बाद भी इस मिशन को चालू रखा था बड़ी चतुराई से पूरा किया था

41वर्षों तक भारत की सेवा करने के बाद जब 1999 Dr Apj Abdul Kalam (DRDO) से रिटायर हुए रिटायर होने के 3 साल बाद में भारत का प्रेसिडेंट बनने का प्रपोजल आया| रिटायर होने के बाद 2001 में कलाम जी अन्ना यूनिवर्सिटी में पढ़ने लगे 1 दिन यूनिवर्सिटी में लेक्चर लेने के लिए यूनिवर्सिटी पहुंचेतब उनको एक कॉल आयाजिस पर उनको कहा गया कि प्राइम मिनिस्टर उनसे बात करना चाहते हैं,और कॉल पर और कोई नहींस्वयं अटल बिहारी वाजपेई बात कर रहे थे और इसी फोन कॉल के साथ साथ 25 जुलाई 2002 को इंडिया के 11 TH राष्ट्रपति बन गए|

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राष्ट्रपति होने के बाद भी उन्होंने अपना टीचिंग का ड्रीम नहीं छोड़ा उनको जब भी समय मिलता वह बच्चों को पढ़ाने के लिए चले जाते टीचर्स डे के एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा अगर लोग मुझे अच्छे शिक्षक के रूप में याद करते हैं यह मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान होगा Dr Apj Abdul Kalam जी को टीचिंग के प्रोफेशन से बहुत ज्यादा लगाव था उन्होंने आखिरी तक टीचिंग नहीं छोड़ी 27 जुलाई 2015 के दिन जब उनको heart attack आया और वह गिर गए तभी भी वह शिलांग की इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट मैं वो पढ़ाने के लिए ही गए थे| इतना ही नहीं उनके जाने के बाद तीन लाख पचास हजार से ज्यादा लोग शामिल थे|

Apj Abdul Kalam Biography In Hindi

Full NameAvul Pakir Jainulabdeen Abdul Kalam
NameDr Apj Abdul Kalam
Father’s Name Jainulabdee
Mother NameAshiamma Jainulabidin
ProfessionEngineer, Scientist, Writer, Professor, Politician
Date Of Birth15 October 1931
Birth PlaceRameswaram
Age83 years
Nationality Indian
Death27 July 2015, Shillong

Q. Apj Abdul Kalam Age

Ans. Dr Apj Abdul Kalam जी की Age 83 years थी

Q. Apj Abdul Kalam Death Date

Ans. Dr Apj Abdul Kalam जी की Death 27 July 2015, Shillong मैं हुई थी|

Q. Who was APJ Abdul Kalam in short biography?

Ans. Dr Apj Abdul Kalam जी जन्म 15 October 1931 हुआ,वह 2002 से 2007 तक भारत के राष्ट्रपति रहे और भारतीय वैज्ञानिक और राजनीतिज्ञ के साथ साथ भारत के मिसाइल और परमाणु हथियार कार्यक्रमों के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई हैं| Dr Apj Abdul Kalam जी की Death 27 July 2015, Shillong मैं हुई थी|

Q. Is APJ Abdul Kalam a doctor?

Ans. Dr. APJ Abdul Kalam जी इंडिया के 11 वे राष्ट्रपति एक प्रतिभाशाली वैज्ञानिक थे उनोने Agni और Prithvi ballistic missiles डिजाइन किया भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण वाहन, SLV-III. को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं।

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